दिल्ली से खाली हाथ लौटे अरुण यादव,नहीं मिला लोकसभा का टिकट
भोपाल
मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी खबर है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने खंडवा बुरहानपुर लोकसभा सीट से बतौर प्रत्याशी जनसंपर्क कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव का टिकट काट दिया है। अरुण यादव आज फिर दिल्ली गए थे और खाली हाथ लौट आए। इतना ही नहीं यादव ने खुद अपनी दावेदारी वापस ले ली है। यहां बताना जरूरी है कि अरुण यादव खंडवा लोकसभा में अपने प्रचार का एक दौर पूरा कर चुके हैं।
दिग्विजय सिंह की -शुभकामनाएँ अरुण- का अर्थ यह था?
दिल्ली से वापस लौटने के बाद अरुण यादव ने रात 10:44 बजे बताया कि 'आज कमलनाथ जी, मुकुल वासनिक जी से दिल्ली में व्यक्तिगत तौर पर मिलकर अपने पारिवारिक कारणों से खण्डवा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से अपनी उम्मीदवारी प्रत्याशी न बनने को लेकर लिखित जानकारी दे दी है, अब पार्टी जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी मैं उनके समर्थन में पूर्ण सहयोग करूंगा।' उल्लेखनीय है कि 30 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर 'शुभकामनाएँ अरुण।' लिखा था। उस समय अनुमान लगाया गया था कि दिग्विजय सिंह ने टिकट फाइनल होने की सूचना दी है लेकिन क्या वह अनुमान गलत था। दिग्विजय सिंह की शुभकामनाओं का अर्थ यह था।
2018 से चल रही है कमलनाथ और अरुण यादव की अनबन
सब जानते हैं कि कमलनाथ ने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले अरुण यादव की कुर्सी खींच ली थी। उस समय भी अरुण यादव ने दिल्ली में बात की थी। उन्हें बताया गया था कि वह प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे, परंतु फिर अचानक कमलनाथ के नाम की घोषणा हो गई। तब सही दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। कमलनाथ ने जब हिंदू महासभा के नेता बाबूलाल चौरसिया का स्वागत करते हुए कांग्रेस पार्टी में शामिल किया अरुण यादव ने कमलनाथ के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया था।

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