झारखंड वन विभाग की पहल, 1500 करोड़ के वनोपज कारोबार को 3000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य
रांची
झारखंड की जैव विविधता को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है। देश और दुनिया को इसके संरक्षण प्रयास और इसमें हुई वृद्धि से परिचित कराने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग अक्टूबर में राष्ट्रीय स्तर पर मेला का आयोजन कर रहा है।
दुनिया भर के पर्यावरणविद, आदिवासी अर्थव्यवस्था पर काम करने वाले लोगों को झारखंड की वन संपदा और इससे जुड़े आजीविका के प्रयासों से परिचित कराया जाएगा। मेले में लगने वाले स्टाल में राज्य के वनवासी क्षेत्र में रहने वाले युवा और उद्यमी अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे।
वन मेला में वेलनेस उत्पादों में हुए नवाचार को भी दिखाया जाएगा। राज्य में वनोत्पाद से होने वाला कारोबार करीब 1500 करोड़ रुपए का है। राष्ट्रीय वन मेला के जरिए इसके अंतर्राष्ट्रीय चेन को विकसित कर करीब 3000 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य बनाया जाएगा
एक ही जगह तुलसी-आंवला से लेकर महुआ और करंज तक के उत्पाद होंगे
वन मेला में लघु वन उपज और इसके औषधीय महत्व को दिखाने वाले स्टाल होंगे। एक ही जगह लोगों को सौंदर्य प्रसाधन से लेकर स्वास्थ्य में उपयोगी शहद भी मिलेगा। मेले में आने वाले विशेषज्ञों का अलग से सत्र भी होगा, जिसमें युवाओं को उत्पाद बनाने और इसकी मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसके अलावा हरित उद्योग को बढ़ावा देने और इसमें युवा के साथ महिलाओं की खास भागीदारी की योजना पर मेले में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया के मेले का मुख्य उद्देश्य ही ग्रामीणों और वनवासियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आमदनी बढ़ाना है।
बाहर के उद्यमी और स्टार्टअप को प्रोत्साहन
राष्ट्रीय वन मेले में स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने वाले बैंक, वित्तीय संस्थाओं को भी आमंत्रित किया गया है। इसमें वनोत्पाद पर काम करने वाले राज्य से बाहर के उद्यमियों को भी बुलाया गया है। राज्य में वनोत्पाद के क्षेत्र में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था के नए स्रोत बनाने के लिए मेले में राज्य सरकार की तैयारियां भी दिखाई जाएंगी।

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