रेत खनन की नीति का विश्लेषण कर मंत्री देंगे रेवेन्यू बढ़ाने के मंत्र
भोपाल
प्रदेश में रेत खनन से अधिकतम राजस्व कैसे प्राप्त किया जाए और अवैध रेत उत्खनन कैसे रोका जाए इसके गुर अब छह मंत्री मिलकर बताएंगे। इन मंत्रियों को इसके लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया है।
राज्य सरकार ने प्रदेश में गौण खनिज रेत के उत्खनन से जुड़े पहलुओं पर विमर्श कर नीतिगत सुझाव देने के लिए छह सदस्यीय मंत्री परिषद समिति गठित की है। इस समिति में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव, वन मंत्री विजय शाह, वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा, खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और नवीन एवं नवकरणीय उर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग को शामिल किया गया है।
मंत्रियों की समिति को 31 जुलाई तक अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को देने का समय दिया गया है। मंत्रियों की यह समिति रेत खनन की मौजूदा नीति का विश्लेषण करेगी। इस नीति में किस तरह के बदलाव करने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक राजस्व रेत खनन से प्राप्त किया जा सके यह मंत्री तय करेंगे। वर्तमान में जो अनाधिकृत रेत उत्खनन हो रहा है उसे किस तरह रोका जा सकता है इसके उपाय भी मंत्री बताएंगे। इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर भी मंत्रियों की यह समिति विचार विमर्श करने के बाद सरकार को उपाय बताएगी।
रेत के डंपरों की जांच के नाम पर जो भ्रष्टाचार होता है उसे रोकने की दिशा में भी यह समिति विचार कर सरकार को सुझाव देगी। कुल मिलाकर आमजन को रेत किस तरह सस्ती मिले और सरकार के खजाने में आने वाला राजस्व अधिक से अधिक कैसे आए इसकी पूरी रूपरेखा यह समिति बनाएगी और सरकार इस पर विचार करने के बाद इसे लागू करने का निर्णय लेगी।
बालाघाट और छिंदवाड़ा में मॉयल लिमिटेड मैगनीज खनिज का सर्वे करेगी तो उस दौरान यदि यदि किसी नवीन खनिज की उपलब्धता प्रमाणित होती है तो मॉयल लिमिटेड को इसकी जानकारी देना होगा।इसके लिए किएगए त्रिपक्षीय एमओयू अनुबंध के अनुसार काम करना होगा। जीएसआई,एटामिक मिनरल डिवीजनद्वारा यदि सर्वे क्षेत्र में कोई काम किया जाना है तो उनके क्षेत्रों को प्रभावित किए बिना सर्वे का कार्य मॉयल को करना होगा।
ाध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और बालाघाट में सरकार मैगनीज खनिज की खोज कराएगी। यह सर्वे मॉयल लिमिटेड से कराया जाएगा। सर्वे के लिए दो साल का समय तय किया गया है जिसे अधिकतम पांच साल तक बढ़ाया जा सकेगा।
खनिज विभाग ने छिंदवाड़ा के 487 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मैगनीज खनिज की खोज करने के लिए मॉयल लिमिटेड को काम सौंपा गया है। वहीं बालाघाट के 850 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में भी मैगनीज खनिज के सर्वे का काम मॉयल को दिया गया है। कंपनी सर्वे कार्य प्रारंभ करने के लिए संचालक भौमिकी और खनिकर्म को सूचना देगा। सर्वे का काम दो साल के भीतर करना होगा इसे तीन साल और बढ़ाया जा सकेगा। सर्वे के बाद मॉयल अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। सर्वे के लिए सभी अनुमतियां मॉयल को ही लेना होगा।
वनक्षेत्र में सर्वे के लिए वन विभाग से अनुमति लेना होगा। प्रतिबंधित क्षेत्र में सर्वे नहीं होगा। कलेक्टर को कार्य प्रारंभ करने से पहले जानकारी देना होगा। सरकारी विभग यदि सर्वे वाले क्षेत्र में काम करते है तो उनके काम प्रभावित न हो इसका भी ध्यान रखना होगा।

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