Thursday, April 16th, 2026

12 अगस्त को लगेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण: दिन में छाएगा अंधेरा, वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी

सूर्य ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए रुक जाता है। यह घटना केवल अमावस्या के दिन संभव होती है, जब तीनों खगोलीय पिंड एक सीध में होते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, सूर्य ग्रहण को सूर्यदेव और राहु-केतु के संबंध से जोड़ा गया है। स्कंद पुराण में इसका वर्णन मिलता है कि राहु और केतु, जिन्होंने अमृत पान का छल किया था, उन्हें भगवान विष्णु ने दंडस्वरूप ग्रह बना दिया। इसी कारण जब राहु सूर्य को निगलता है, तो सूर्य ग्रहण लगता है।

12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण खगोलीय रूप से रोमांचक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र अवसर होगा। हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा परंतु ग्रहण काल के नियमों का पालन और मंत्र जप इस दिन शुभ फल प्रदान कर सकता है। जो व्यक्ति इस समय आत्मचिंतन, ध्यान और प्रार्थना करता है। उसके जीवन में सूर्य की तरह नई रोशनी अवश्य आती है।

सूर्य ग्रहण 2026 की तिथि और समय
12 अगस्त 2026, बुधवार को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। इस ग्रहण का दृश्य आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और रूस के कुछ हिस्सों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। यहां के लोगों को कुछ क्षणों के लिए दिन में रात जैसा अंधकार दिखाई देगा। वहीं यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जाएगा।
भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। 2026 में एक और सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को भी लगेगा, जो आंशिक रहेगा।

सूर्य ग्रहण का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
धार्मिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण के समय सूर्यदेव की पूजा व मंत्र जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। पद्म पुराण में कहा गया है कि ग्रहण काल में किया गया जप, ध्यान और दान सौ गुना अधिक फलदायी होता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक खगोलीय संयोग है। इस दौरान सूर्य की किरणों का कुछ भाग पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता, जिससे कुछ स्थानों पर अस्थायी अंधकार फैल जाता है।


हिंदू शास्त्रों और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में विशेष सावधानी रखनी चाहिए-
ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें।
नुकीली वस्तुओं जैसे सुई, चाकू, कैंची का प्रयोग न करें।
घर की खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखें ताकि हानिकारक किरणें भीतर न आएं।

भगवान विष्णु या सूर्यदेव के मंत्रों का जप करें, जैसे “ॐ नमो भगवते सूर्याय आदित्याय नमः।” यह मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा देता है।

 

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Source : Agency

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