Tuesday, October 20th, 2026

उम्मीद की किरण है गर्भ प्रत्यारोपण

गर्भ प्रत्यारोपण उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जो गर्भधारण नहीं कर सकती। इस तकनीक के जरिए दूसरी महिला का गर्भ प्रत्यारोपित करके गर्भधारण कराया जाता है। यह उन महिलाओं के लिए वरदान की तरह है जो किसी बीमारी के कारण या गर्भ में समस्या के कारण मां बनने का सुख नहीं प्राप्त कर सकती हैं।

प्रत्यारोपण रहा सफल
गर्भ प्रत्यारोपण का प्रयास कई सालों से हो रहा है, लेकिन पहली बार सफलता प्राप्त की स्वीडन के चिकित्सकों ने। स्वीडन के डॉक्टरों ने अजूबा कर दिखाया। 36 साल की एक ऐसी महिला को मां बनने की खुशी दे दी, जिसके पास गर्भाशय ही नहीं था। यह मामला इसलिए भी खास है, क्योंकि दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ है कि प्रत्यारोपित गर्भाशय से जन्म लेने वाला बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।

पहले भी हुए प्रयास
इससे पहले भी गर्भाशय प्रत्यारोपण के जरिए कई प्रयास किए गए लेकिन कभी उन्हें शरीर ने स्वीकार नहीं किया तो उसे निकालना पड़ा तो कभी गर्भपात हो गया। 2000 में पहली बार सऊदी अरब में यूटरस ट्रांसप्लांट किया गया था। चार माह बाद ही महिला के शरीर ने ऑर्गन को रिजेक्ट कर दिया। आखिर उसे निकालना पड़ा। इसके बाद टर्की में कोशिश हुई। शरीर ने गर्भाशय तो स्वीकार कर लिया, लेकिन गर्भपात हो गया।

बच्चा है स्वस्थ
स्वीडन में पैदा हुआ बच्चा 1.8 किलो (3.9 पौंड) का है। प्रसव सिजेरियन के जरिए हुआ है। सात अन्य महिलाओं को भी इसी तरह यूटेरस ट्रांसप्लांट किए गए हैं। पांच अब भी गर्भवती हैं। डॉक्टर आशान्वित है कि जल्द ही और खुश-खबरें भी मिलेंगी।

समस्याएं भी आईं
प्रत्यारोपित गर्भ से गर्भधारण के बीच में कई तरह की समस्याएं भी आईं। गर्भधारण के 31वें हफ्ते तक सबकुछ सामान्य रहा। इसके बाद महिला को हाई ब्लडप्रेशर से जुड़ी प्री-एक्लांपसिया बीमारी हो गई। बच्चे की हार्ट रेट भी असामान्य पाई गई। डॉक्टरों ने समय पूर्व डिलिवरी कराने का फैसला किया। लेकिन बाद में सबकुछ ठीक हो गया, लेकिन प्रसव सिजेरियन के जरिए हुआ।

महिला ब्रीमारी से ग्रस्त थी
जिस महिला को गर्भ प्रत्यारोपण के बाद मां बनाया गया वह रॉकिटांस्की जेनेटिक सिंड्रोम से पीडि़त थी। 4500 में से किसी एक महिला को यह बीमारी होती है। महिला जब 15 साल की हुई तो पहली बार उसे इसका पता चला। महिला को उसकी 61 साल की पारिवारिक मित्र ने अपना यूटेरस दान किया। चिकित्सक तब हैरान रह गए जब 61 साल की इस महिला की कोख गर्भधारण के लिए टेस्ट में दुरुस्त पाई गई, जबकि सात साल पहले उसका मेनोपॉज बंद हो चुका था। यह उन महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण की तरह है जो किसी परेशानी के कारण मां बनने में सफल नहीं हो पाती है।

 

Source : Agency

पाठको की राय