सहारनपुर में 71% मतदान ने उड़ाई सियासी दलों की नींद, जानें सभी 7 सीटों पर कैसा रहा वोटिंग का ट्रेंड
सहारनपुर
सहारनपुर की सभी सातों सीटों पर भारी मतदान ने सियासी दलों की नींद उड़ा दी। मतदान के ट्रेंड से संकेत मिलते हैं कि सभी सातों सीटों पर भाजपा और सपा के बीच घमासान रहा। कुछ सीटों पर बसपा के हाथी ने समीकरण बिगाड़ने की कोशिश जरूर की है, लेकिन बाकी अन्य छोटे दलों की दाल गलती नजर नहीं आ रही है। सहारनपुर में सत्ता संग्राम में भागीदारी कर रहे मतदाताओं ने भारी मतदान करके चौंका दिया। दस मार्च को चौंकाने वाले नतीजे भी आ सकते हैं।
सहारनपुर की सातों विधानसभा सीटों का गणित इस बार काफी अलग था। चुनाव से पहले ही पाला बदलने की राजनीति शुरू हो गई थी। इमरान मसूद ने कांग्रेस को अलविदा कहकर सपा का दामन थाम लिया। दल बदलने वाले वह अकेले नहीं थे। प्रदेश सरकार में आयुष मंत्री रहे डा.धर्म सिंह सैनी भी भाजपा छोड़कर सपा में आ गए। कांग्रेस छोड़कर सिटिंग विधायक नरेश सैनी ने भाजपा का दामन थाम लिया। इसी तरह बसपा को छोड़ कर पूर्व विधायक जगपाल सिंह ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। नकुड़ में भी सपा को छोड़कर साहिल खान ने बसपा का दामन थाम लिया। उधर, आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर ने सपा से हाथ मिलाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। यानी अधिकांश सीटों पर दलबदल हावी रहा। पेश है सूर्यकांत द्विवेदी/सीपी सिंह/राकेश प्रियदर्शी की रिपोर्र्ट...
मतदान में ऐसा लगा मानो यह फैक्टर कहीं है ही नहीं। हिन्दुस्तान टीम ने सहारनपुर की सातों सीटों की पड़ताल की। देवबंद के हर मतदान केंद्र के बाहर यही आलम था। कंधे पर बैग टांगे बच्चे मिले, जिन्होंने मतदान किया। देवबंद की सीट पर इस बार बदली-बदली हवा थी। पिछली बार इस सीट पर भाजपा के बृजेश सिंह चुनाव जीते थे। इस बार पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राणा के पुत्र कार्तिकेय राणा से कड़ी टक्कर मिल रही है। बसपा से राजेंद्र चौधरी हैं। देवबंद के जानकार कहते हैं कि बसपा से कुछ समीकरण बदल सकते हैं।
नकुड़ में कांटे की टक्कर
प्रदेश की राजनीति में नकुड़ की सीट डा.धर्म सिंह सैनी के कारण हॉट है। धर्म सिंह सैनी चार बार के विधायक हैं। तीन बार वह बसपा से विधायक रहे। एक बार भाजपा से। इस बार वह सपा से प्रत्याशी हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य से उनके घनिष्ठ संबंध रहे हैं। इस सीट पर रिकॉर्ड मतदान हुआ। 76 फीसदी मतदान करके वोटरों ने झोली भर दी। अब किसकी भरी यह देखना है। इस सीट पर सैनी के मुकाबले बसपा से साहिल खान और भाजपा से मुकेश चौधरी प्रत्याशी हैं। यहां भी कांटे की टक्कर है।
सीट नंबर-एक पर भी संघर्ष
बेहट प्रदेश की सीट नंबर एक है। यहां नरेश सैनी (भाजपा), उमर अली खान (सपा) और रईस मलिक (बसपा) के बीच मुकाबला माना जा रहा है। मुख्य टक्कर भाजपा और सपा के बीच ही है। भाजपा की पिछली लहर में बेहट की सीट कांग्रेस ने निकाली थी।
नगर में भी घमासान
भाजपा की लहर में सहारनपुर नगर की सीट संजय गर्ग ने जीती थी। इस बार उनके सामने थोड़ी परेशानी है। भाजपा से राजीव गुम्बर और बसपा से मनीष अरोड़ा के साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंदर कौर भी मुकाबले में हैं। शहर की सीट पर बाकी सीटों का गणित नहीं चलता है। इसलिए, शहर की सीट पर तमाम मुद्दे भी हावी हैं।
माया की सीट पर भी मुकाबला
सहारनपुर देहात की सीट पहले हरौड़ा के नाम से जानी जाती थी। इस सीट से जीतकर बसपा प्रमुख मायावती दो बार मुख्यमंत्री बनीं। इस बार समीकरण बदले हुए हैं। किसी वक्त मायावती के खास रहे जगपाल सिंह इस बार भाजपा से प्रत्याशी हैं। उनके मुकाबले सपा से आशु मलिक और बसपा से अजब सिंह मैदान में हैं। यहां मुकाबला तिकोना नजर आया।

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