PayTm जिन सेगमेंट में कारोबार कर रही है उनमें बाजार में तगड़ी प्रतियोगिता: संदीप सभरवाल
जब आप किसी शेयर की खरीदारी करते हैं तो आपको सावधान रहना चाहिए। आपको यह समझना चाहिए आप किस कीमत पर शेयर खरीद रहे हैं और आपके पोर्टफोलियो में इस तरह के शेयरों की हिस्सेदारी कितनी है। शेयर बाजार के विशेषज्ञ संदीप सभरवाल ने कहा है कि वह किसी भी कीमत पर पेटीएम के शेयर नहीं खरीद सकते।
संदीप सभरवाल ने कहा है कि वे पेटीएम के बिजनेस मॉडल को नहीं समझ पाए हैं। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि पेटीएम को अपने कारोबार में मुनाफा कब तक होगा। अगर पेटीएम इस तरह का कारोबार कर रही है कि वह अपनी कंपनी किसी को बेचना चाहते हैं तब तो इसका बिजनेस मॉडल ठीक है। लेकिन पेटीएम जिन सेगमेंट में कारोबार कर रही है उनमें बाजार में तगड़ी प्रतियोगिता है। इस हिसाब से पेटीएम के बिजनेस मॉडल के मुनाफे में आने पर संदेह है, यह वास्तव में समझना बहुत मुश्किल है। इसलिए संदीप सभरवाल पेटीएम के शेयर को किसी भी कीमत पर नहीं खरीदना चाहते।
Nykaa और ज़ोमैटो पर राय
नए जमाने की टेक कंपनियों के शेयर पर संदीप सभरवाल ने कहा कि नायका के शेयरों में अब तक करेक्शन नहीं हुआ है। इसके साथ ही जोमैटो के शेयर भी अभी उस लेवल पर नहीं आए हैं जब उसमें खरीदारी की जानी चाहिए। संदीप ने कहा कि जोमैटो के पास एक ऐसा बिजनेस मॉडल है जिसकी वजह से उसके शेयरों की खरीदारी की जा सकती है।हालांकि तिमाही दर तिमाही आधार पर जोमैटो लगातार नुकसान उठा रही है।
मुनाफा कमाने में फिसड्डी
संदीप सभरवाल का कहना है कि नए जमाने की ट्रैक कंपनियां वास्तव में मुनाफा कमाने के मामले में फिसड्डी साबित हुई है। जब इन कंपनियों के शेयर सही वैल्यूएशन पर मिले तब लोगों को इसमें निवेश करने के बारे में सोचना चाहिए। संदीप सभरवाल ने कहा है कि वे पॉलिसी बाजार, पेटीएम जैसी कंपनियों के शेयरों को खरीदने से बचना चाहते हैं।
कमजोरी आने पर निवेश की सोचें
संदीप सभरवाल ने कहा कि ब्यूटी प्रोडक्ट कंपनी नायका मुनाफे में आने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा जिस हिसाब से फाल्गुनी नायर की कंपनी नायका ने ग्रोथ किया है अगर इसके शेयर सही कीमत पर मिले तो इसमें निवेश किया जा सकता है। अगर शेयर बाजार के आम निवेशकों की बात करें तो वह इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल को नहीं समझ पाए हैं। ऐसे कई मौके आए हैं जब नए जमाने के कारोबार शेयर बाजार में लिस्ट होते हैं और लोग उसकी सही वैल्यू नहीं समझते। साल 2006-07 के दशक में रियल एस्टेट कंपनियों की यही हालत थी। लोग उनकी वैल्यू नहीं समझ पाए और उस समय सूचीबद्ध हुई अधिकतर कंपनियों के शेयर 90 फ़ीसदी तक गिर गए। इन कंपनियों के बारे में भरोसे से कुछ भी नहीं कहा जा सकता।

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