तीन श्रेणियों में होगा महिला हेल्प डेस्क का गठन
भोपाल
प्रदेश में महिला अपराधों की रोकथाम के लिए 700 थानों में शुरू होने जा रही महिला हेल्प डेस्क को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसमें 75 से ज्यादा अपराध वाले थानों की डेस्क की जिम्मेदारी सात अफसरों और जवानों के पास होगी। जबकि बाकी की दो श्रेणियों के थानों में डेस्क की कमान सात से कम पुलिस अफसरों और जवानों के पास होगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रदेश के 700 थानों में महिला हेल्प डेस्क के गठन के लिए सात करोड़ रुपये दिए हैं। इसमें प्रत्येक डेस्क के लिए एक लाख रुपये खर्च करने की व्यवस्था है।
प्रदेश में 141 थानों में पूर्व से ही महिला हेल्प डेस्क का संचालन हो रहा है। अब प्रदेश के 700 और थानों में ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क शुरू की जा रही है। इस डेस्क को महिला अपराधों की संख्या के आधार पर अ, ब और स श्रेणी में बांटा गया है। पूर्व से संचालित 141 डेस्क अ श्रेणी में रहेगी। इस तरह से अब प्रदेश के 841 थानों में महिला डेस्क हो जाएगी।
एक वर्ष में 75 से अधिक महिला अपराध होने वाले थाना क्षेत्र की डेस्क को अ श्रेणी में रखा जाएगा। यहां एक महिला उपनिरीक्षक, दो प्रधान आरक्षक और चार आरक्षक का स्टाफ रहेगा। एक वर्ष में 40 से 75 महिला अपराधों पर डेस्क को ब श्रेणी में रखेंगे। यहां महिला उप निरीक्षक या सहायक उप निरीक्षक का एक और प्रधान आरक्षक या आरक्षक के चार पद रहेंगे। स श्रेणी में वह डेस्क रहेगी, जहां प्रतिवर्ष 40 से कम शिकायतें आती हैं। यहां महिला उप निरीक्षक या प्रधान आरक्षक का एक और आरक्षक के तीन पद रहेंगे।
यह रहेगी व्यवस्था
संबंधित थाने के थाना प्रभारी महिला डेस्क के प्रभारी रहेंगे। महिला डेस्क की संचालक थाने में पदस्थ महिला अधिकारी को बनाया जाएगा। प्रधान आरक्षक (मोहर्रिर) डेस्क के समन्वयक रहेंगे।

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