मेघालय के गवर्नर सत्यपाल मलिक बयानों की वजह से अक्सर बटोरते रहे हैं सुर्खियां
नई दिल्ली
मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक इन दिनों किसान आंदोलन पर दिए अपने बयान की वजह से सुर्खियों में हैं। अपने गृह जिले यूपी के बागपत में मलिक ने कई दावे किए। किसान नेता राकेश टिकैत की गिरफ्तारी रुकवाने का दावा किया। किसान आंदोलन पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह को चेताने का दावा किया। मलिक ने दावा किया कि उन्होंने पीएम मोदी और शाह को चेताया है कि सिखों से पंगा न लें, उन्हें दिल्ली से खाली हाथ न लौटाएं, यह कौम 300 साल तक याद रखती है। मलिक इस बार इन दावों की वजह से सुर्खियां बटोर रहे हैं लेकिन अक्सर वह अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चाओं में रहते हैं। आइए एक नजर डालते हैं उनके कुछ चर्चित बयानों पर। जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहते मलिक की आतंकवादियों को दी गई 'सलाह' भी ऐसा ही चर्चित बयान है। उन्होंने श्रीनगर के एक कार्यक्रम में कहा था कि आतंकियों को उन लोगों की हत्या करनी चाहिए जिन्होंने राज्य को लूटा है, न कि बेगुनाह लोगों की हत्या करनी चाहिए। मलिक ने कहा था, 'तुम (आतंकवादी) निर्दोषों को क्यों मार रहे हो? SDos और PSOs को क्यों मार रहे हो? तुम्हें ये सब करके क्या मिलेगा? अगर तुम्हें मारना ही है तो क्यों नहीं भ्रष्टों को मार रहे हो जिन्होंने लंबे वक्त से देश और कश्मीर को लूटा है? उनमें से कोई कभी मारा गया है?'
जम्मू-कश्मीर को आर्टिकल 370 के तहत मिले विशेष दर्जा को अगस्त 2019 में खत्म किया गया। उसके 2 महीने बाद ही मलिक को जम्मू-कश्मीर से हटाकर गोवा का गवर्नर बनाया गया। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल पद को लेकर विवादित टिप्पणी की। मलिक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किए गए शख्स के पास 'गोल्फ खेलने और शराब पीने' के अलावा कोई काम ही नहीं होता। बागपत के कार्यक्रम में मलिक ने कहा, "किसानों के मामले पर जब मैंने देखा कि क्या-क्या हो रहा है तो मैं रुक नहीं सका, मैं बोला। मैंने माननीय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री, दोनों को कहा कि दो मेरी प्रार्थना है। एक तो इनको (किसानों) दिल्ली से खाली हाथ मत भेजना क्योंकि ये सरदार लोग 300 साल तक याद रखते हैं और दूसरे इनपर बलप्रयोग मत करना। जिस दिन (राकेश) टिकैत की गिरफ्तारी का शोर मचा हुआ था, उस दिन 11 बजे मैंने हस्तक्षेप करके उसको रुकवाया और कहा कि यही मत करना। उसका मुझे नुकसान भी होता है।" मलिक ने मंच से दावा करते हुए कहा, "मैं एक बहुत बड़े जर्नलिस्ट से मिलकर आया हूं जो प्रधानमंत्री के बहुत अच्छे दोस्त हैं। मैंने उनसे कहा कि भाई मैंने तो कोशिश कर ली, अब तुम उनको समझाओ कि ये गलत रास्ता है। किसानों को दबाकर यहां से भेजना, अपमानित करके दिल्ली से भेजना... पहले तो ये जाएंगे नहीं... दूसरे चले गए तो ये 300 बरस भूलेंगे नहीं। ज्यादा करना भी नहीं है, सिर्फ एमएसपी को कानूनी तौर पर मान्यता दे दो... सारा मामला... मेरी जिम्मेदारी है मैं निपटवा दूं।"
मेघालय के राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और ब्लूस्टार ऑपरेशन का जिक्र कर एक तरह से मोदी को इशारा किया कि वे सिखो से पंगा न लें। मलिक बोले, "अगर ये (किसान आंदोलन) ज्यादा चलता रहा तो मैं नहीं जानता कि आप में से कितने लोग जानते हो, लेकिन मैं सिखों को जानता हूं। मिसेज (इंदिरा) गांधी ने जब ब्लूस्टार किया, उसके बाद उन्होंने अपने फार्महाउस पर एक महीना महामृत्युंजय का यज्ञ कराया। अरुण नेहरू ने मुझे बताया कि मैंने कहा कि फूफी आप तो ये बात नहीं मानती, ये क्यों करा रही हैं... तो उन्होंने कहा कि तुम्हें पता नहीं है मैंने इनका अकाल तख्त तोड़ा है, ये मुझे छोडेंगे नहीं। उनको लग रहा था कि ये होगा। जनरल वैद्य को पूना में जाकर के मारा।" बागपत में पैदा हुए सत्यपाल मलिक अलीगढ़ से सांसद रहे हैं। उन्हें 2017-18 के बीच बिहार में राज्यपाल बनाकर भेजा गया। वे पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के आखिरी राज्यपाल थे। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया गया था। इसके बाद नवंबर 2019 में मलिक को गोवा भेज दिया गया। वहां अगस्त 2020 तक रहने के बाद उन्हें मेघालय का राज्यपाल बना दिया गया। वह ओडिशा के राज्यपाल भी रह चुके हैं। मलिक कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते रहे हैं। किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने पहले भी कहा था कि 'किसी भी आंदोलन को दबाकर और कुचलकर शांत नहीं किया जा सकता है।' मलिक के सियासी करियर की बात करें तो वह 1980 में लोकदल से राज्यसभा में पहुंचे। जब कार्यकाल खत्म हुआ तो 1986 में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 1989 में वह अलीगढ़ लोकसभा सीट से जनता दल के टिकट पर जीते। 1996 के लोकसभा चुनाव में वह समाजवादी पार्टी से लड़े लेकिन हार गए। बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए। 2017 में उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया। एक साल बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया। 2019 में उन्हें गोवा भेजा गया और 2020 में वहां से हटाकर मेघालय का गवर्नर बनाया गया।

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