Tuesday, October 20th, 2026

विधि का शासन बना रहे भविष्य के न्यायाधीश भी रखें इस बात का ध्यान: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

जबलपुर
राष्टÑपति रामनाथ कोविंद ने आॅल इंडिया स्टेट ज्यूडिशियल डायरेक्टर्स रिट्रीट प्रोग्राम में कहा  कि न्यायाधीश को किसी भी संस्था-व्यक्ति,संगठन के प्रति पूर्वाग्रह और संचित मान्यताओं से मुक्त हो कर न्यायदान करना चाहिए। न्याय प्रशासन में संख्या से अधिक गुणवत्ता का महत्व है। इसलिए न्यायिक सेवा में आने से पहले न्यायिक अकादमी में न्यायाधीश की ट्रेनिंग होनी चाहिए। शीघ्र न्याय प्रदान करने आज ट्रेनिंग-ई-टेक्नीक की अहम भूमिका है। समय-सीमा में विवाद निपटारे के लिए न्यायाधीश को भी विधि और प्रक्रिया सहित व्यवहारिक दक्षता का ध्यान रखना चाहिए।

राष्टÑपति ने कहा एक समय हमारे यहां स्वयं पक्षकार को अपने प्रकरण के सम्बंंध में दस्तावेजी अध्यन, निर्णय को समझना कठिन होता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा 9 स्थानीय भाषाओं में इनका अनुवाद करने की शुरुआत के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। मेरी ईच्छा है कि आगामी समय में सभी हाईकोर्ट भी इसको करेंगे, वर्तमान समय में अनेक हाईकोर्ट द्वारा इसकी शुरुआत की जा चुकी है। इस अवसर पर राष्टÑपति ने न्यायदान प्रक्रिया के सरलीकरण, निस्तारण आदि पर बल देते हुए लोक अदालत, आर्बिट्रेशन,ट्रिब्यूनल आदि की महत्ता पर भी अपने विचार व्यक्त किए।

साथ ही कहा कि भविष्य के न्यायाधीशों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विधि का शासन बना रहे इसलिए परिवर्तन,सिद्धांत आदि स्वीकार करना चाहिए। राष्टÑपति ने कोविड-19 महामारी के दौरान न्यायपालिका की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस दौरान भी देश में 76 लाख प्रकरण पर सुनवाई हुई। इसके पहले राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कोरोना महामारी के दौर में न्यायपालिका की अहम भूमिका रही।

आज इतने प्रबुद्धजन एकत्रित होकर मंथन कर रहे हैं तो इससे मिलने वाले उच्च विचार सब तक पहुंचना चाहिए। इसके पहले चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया शरद अरविंद बोवड़े ने कहा कि भारत जैसे वृहद देश का न्यायिक इतिहास काफी विस्तृत है। भारत के न्यायालय में न्यायदान की परम्परा आगे बढ़ती गई। चीफ जस्टिस ने कोरोनाकाल में न्यायपालिका की भूमिका की सराहना करते हुए स्थानीय भाषाओं में भारत के न्यायालय पुस्तक पर भी प्रकाश डाला।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक खान की उपस्थिति में इस अवसर पर भारत के न्यायालय पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि भारत की न्यायपालिका पर देश का नागरिक ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे देश की अदालत तक पूरा विश्वास करती हैं यह हमारा गौरव है। भारत की न्यायदान परम्परा नैसर्गिक सिद्धांतों का सम्मान करती है।

 

#राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

Source : Agency

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