35वीं रविवासरीय संगीत सभा में उज्जैन के सारंगी वादक ने बांधा समां
रायपुर
कोरोना काल के दौरान बंद हुई संगीत प्रस्तुतियों को जीवंत रखने के लिए शुरू हुए आॅनलाइन आयोजन का दौर हर सप्ताह जारी है। इसी के तहत गुनरसपिया फाउंडेशन की 35वीं संगीत सभा में रविवार को उज्जैन के प्रतिभाशाली युवा कलाकार सैय्यद अर्शद ने सारंगी वादन की प्रस्तुति दी। ग्वालियर घराने के प्रख्यात संगीत गुरु उस्ताद अब्दुल हामिद लतीफ एवं पद्मसारंगी नवाज उस्ताद अब्दुल लतीफ खां साहब के गंडाबन्ध शागिर्द सैय्यद अर्शद शास्त्रीय वादन के क्षेत्र में एक सशक्त युवा हस्ताक्षर हैं।
सैय्यद अर्शद ने अपने सारंगी वादन की शुरूआत राग-रामकली से की। उन्होंने विलंबित एकताल, मध्यलय एवं द्रुतलय तीनताल में-दुगुन, चौगुन और तिहाइयों की शानदार लयकारी की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर हेमंत चरेगांवकर ने बड़ी सुंदर संगत की। श्रोताओं ने उनके कार्यक्रम में लगातार दाद दी। अब तक गुनरस पिया की सभा में गायन, तबला वादन, सितार-सरोद-सारंगी-संतूर वादन की प्रस्तुतियां हो चुकी हैं। युवा एवं नवोदित कलाकारों को रविवासरीय संगीत सभा के माध्यम से जन जन तक पहुचाने का कार्य संस्था द्वारा अनवरत जारी है। कार्यक्रम के संयोजक दीपक व्यास ने बताया कि गुनरस पिया फाउंडेशन द्वारा कोरोना काल में देश-विदेश के कलाकारों को फेसबुक के माध्यम से कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए अवसर दिया जा रहा है।
गुनरस पिया फाउंडेशन शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार के लिए लगातार कार्य कर रहा है। यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा, जब तक कोरोना की वजह से संगीत आयोजनों पर लगा सार्वजनिक आयोजन का प्रतिबंध खत्म नहीं हो जाता। हर सप्ताह होने वाले कार्यक्रमों का संगीत प्रेमियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। आॅनलाइन आयोजन का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अन्य शहरों में घर बैठे संगीत के उस्ताद अपना हुनर दिखा रहे हैं। जिसे देश-विदेश में रह रहे संगीत रसिक देखकर अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं और संगीत के फनकारों, शास्त्रीय गायकों को एक सशक्त मंच मिला है, जो लोग सुबह आॅनलाइन शामिल नहीं हो सकते वे बाद में भी इसका लुत्फ ले रहे हैं।

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