राज्यपाल को ज्ञापन सौपकर,दिल्ली रवाना होंगे सैकड़ों किसान
रायपुर। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर शनिवार को छत्तीसगढ़ किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा सहित छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन से जुड़े घटक संगठनों द्वारा पूरे प्रदेश में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर कॉपोर्रेटपरस्त कृषि कानूनों को वापस लेने और फसल की सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का कानून बनाने की मांग की जाएगी। ज्ञापन सौंपने के बाद सैकड़ों किसान और ग्रामीण जन दिल्ली में आयोजित किसान गणतंत्र परेड में शामिल होने के लिए रवाना होंगे।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी किसान गणतंत्र परेड आयोजित किये जा रहे हैं। सभी स्थानों पर ये परेड सरकारी कार्यक्रमों के बाद आयोजित किये जायेंगे। केंद्र सरकार द्वारा इन कानूनों के अमल पर डेढ़ साल तक रोक लगाने की बात को धोखाधड़ीपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि इन कानूनों में पोल ही पोल है, लेकिन इसके बावजूद यह सरकार इनको लागू करने पर तुली हुई है। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा केंद्र सरकार की घोषणा को ठुकराए जाने का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा है कि जिंदगी और मौत की लड़ाई में बीच का रास्ता नहीं होता और किसान विरोधी इन कानूनों की वापसी ही एकमात्र विकल्प है। इस आंदोलन में डेढ़ सौ से ज्यादा किसानों ने अपनी शहादत दी है और ये शहादतें व्यर्थ नहीं जाएंगी और अंतिम सांस तक खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले इन कॉपोर्रेटपरस्त कानूनों के खिलाफ देश के किसान और अवाम मिलकर संघर्ष करेंगे।
किसान सभा नेताओं ने कहा कि एक ओर सरकार समर्थन मूल्य की प्रणाली जारी रहने की घोषणा कर रही है, वहीं दूसरी ओर संघी गिरोह और गोदी मीडिया इसके उपयोगी न रहने का दुष्प्रचार कर रहा है। वास्तविकता यह है कि निजी मंडियों के अस्तित्व में आने के बाद और खाद्यान्न व्यापार को विश्व बाजार की कीमतों के साथ जोड?े के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य की पूरी व्यवस्था ही ध्वस्त जो जाएगी। इसलिए यदि मोदी सरकार अपने कहे के प्रति भी गंभीर है, तो आश्वासन से ऊपर उठकर उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का कानून बनाना चाहिए, ताकि किसान समुदाय को इस सरकार की कथनी पर विश्वास हो सके।
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