भाजपा प्रभारी पुरंदेश्वरी के दावों को कांग्रेस ने बताया झूठा
रायपुर
धान की राजनीति सूबे में कांग्रेस व भाजपा के बीच गरमा गई है। आरोप प्रत्यारोप के बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी ने रविवार को दावा किया कि केंद्र सरकार ने धान खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ को 9 हजार करोड़ रुपए दिए हैं। उसके बाद भी राज्य सरकार किसानों का धान ठीक से नहीं खरीद रही है। इस दावे पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा, डी. पुरंदेश्वरी का दावा झूठा है।
मरकाम ने कहा, सच तो यह है कि केंद्र सरकार ने कोई अग्रिम भुगतान नही किया है। राज्य सरकार मार्कफेड के माध्यम से धान खरीदती है। धान खरीदी के लिए मार्कफेड विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेती है। जिसकी ब्याज सहित वापसी मार्कफेड की जिम्मेदारी है। इस वर्ष इस मद में 16 हजार करोड़ रुपए ऋण प्रस्तावित है।मार्कफेड ने नेशनल कोआॅपरेटिव डेवलपमेंट कॉपोर्रेशन से 9500 करोड़ का कर्ज ले लिया है। इसमें केंद्र सरकार ने न एक रुपए तक की भी सहायता न दिया है और न अनुदान। मरकाम ने कहा, भाजपा प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी अगर छत्तीसगढ़ के किसानों का भला चाहती हैं तो भाजपा के 11 सांसदों और 14 विधायकों को लेकर दिल्ली जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करें। मरकाम ने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों से जो घटनाक्रम हो रहा है। भाजपा नेताओं के जैसे बयान आ रहे हैं, उससे एक बात स्पष्ट हो गयी कि छत्तीसगढ़ भाजपा के नेता धान खरीदी को बाधित करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार इन नेताओं की मंशा के अनुरूप धान खरीदी पर तमाम तरीके की अड़ंगेबाजी लगाने में लगी है।
मरकाम ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भाजपा सांसदों पर केंद्र सरकार को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ये लोग किसानों को मिल रहे प्रति एकड़ 10 हजार रुपए की सहायता राशि को केंद्र के सामने बोनस बता रहे हैं। भाजपा नेताओं की बातों में आकर केंद्र सरकार ने सेंट्रल पूल के लिए 24 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की स्वीकृति दी है। जबकि केंद्र सरकार 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की सहमति पहले दे चुकी थी। मरकाम ने कहा, कांग्रेस पार्टी किसानों की मदद करने वाली राजीव गांधी किसान न्याय योजना के समर्थन में है। हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि किसानों के विरोध में खड़े छत्तीसगढ़ भाजपा सांसदों की गुमराह करने वाली शिकायतों को किनारे रखें। किसानों के हक में छत्तीसगढ़ को पूर्व में दी गई 60 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का कोटा यथावत रखें और एफसीआई में चावल लेने की अनुमति प्रदान करें।

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