बिहार: नेपाल बॉर्डर से कुरसेला तक कोसी नदी में डॉल्फिन समेत जलीय जीवों का सर्वेक्षण शुरू
सहरसा
नेपाल बॉर्डर से सुपौल, सहरसा होते कटिहार के कुरसेला तक कोसी नदी में पल रहे डॉल्फिन, कछुआ, पंछी, सांप सहित अन्य जलीय जीवों का सर्वेक्षण शुरू किया गया है। पहले कोसी नदी किनारे के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों का फीडबैक लेते जानने की कोशिश की जा रही कि कितनी संख्या और प्रकार के डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों को वे विचरते देखते। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण संस्थान देहरादून(उत्तराखंड) के विशेषज्ञों के साथ वन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग ने नेपाल बॉर्डर तरफ से सर्वे शुरू किया है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण संस्थान देहरादून के विशेषज्ञ डॉ. गोपाल शर्मा टीम को लीड कर रहे हैं। सर्वेक्षण के लिए उनके सहित 13 विशेषज्ञ आए है। वहीं वन विभाग की तरफ से सहरसा व सुपौल के वन प्रमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार शरण, सहरसा, सुपौल और भागलपुर के रेंज ऑफिसर, वनपाल सहित पांच लोग सर्वेक्षण में शामिल हैं। सहरसा व सुपौल के डीएफओ ने बताया कि दस फरवरी से शुरू सर्वेक्षण दस मार्च तक चलेगा। एक माह तक चलने वाले सर्वेक्षण के दौरान नेपाल बॉर्डर से कुरसेला तक कोसी नदी में कितनी संख्या में डॉल्फिन, कछुआ, सांप है उसका अध्ययन किया जाएगा। नदी के तट पर और नदी में कितनी संख्या में पक्षी सहित अन्य जलीय व वन्य प्राणी हैं उसकी गिनती करते आंकलन किया जाएगा। यह भी अध्ययन किया जाएगा कि जलीय जीव किस तरह का भोजन पसंद करते। कौन सी मछली को अपना निवाला बनाते। उन्होंने कहा कि नेपाल बॉर्डर के वीरपुर से कुरसेला तक 150 किमी से अधिक दूरी में कोसी नदी में नाव से भ्रमण कर सर्वेक्षण किया जाएगा। डॉल्फिन कितनी संख्या में बड़ा और छोटा है उसका आंकलन किया जाएगा। पानी का बहाव डॉल्फिन के रहने लायक है या नहीं उसे भी देखा जाएगा।
जलीय जीवों की संख्या कम तो नहीं हो रही, करेंगे अध्ययन
डॉल्फिन, कछुआ, पक्षी सहित अन्य जलीय जीवों की संख्या कम तो नहीं हो रही उसका विशेषज्ञों की टीम अध्ययन करेगी। सर्वेक्षण के दौरान यह भी देखेगी कि कुरसेला में गंगा में मिलने वाली कोसी नदी का पानी कितना साफ है और उसका क्वालिटी कैसा है। सर्वेक्षण के बाद डॉल्फिन सहित अन्य दुर्लभ जलीय जीवों के संरक्षण की योजना बनाई जाएगी।
कल्याणपुर, बसबिट्टी सहित अन्य गांवों में किया संपर्क
सर्वेक्षण में निकली टीम अब तक वीरपुर के कल्याणपुर, सुपौल के बसबिट्टी सहित अन्य गांवों में ग्रामीणों से संपर्क कर चुकी है। कितनी संख्या में जलीय जीवों की गतिविधियां देख रहे उसकी जानकारी लेते उसके संरक्षण के लिए ग्रामीणों को जागरूक कर चुकी है।
वीरपुर बराज से सर्वेक्षण करने की नेपाल सरकार ने नहीं दी अनुमति
वीरपुर बराज से ही वन विभाग सर्वेक्षण कराना चाहती थी पर नेपाल सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। डीएफओ ने कहा कि बिना नेपाल सरकार की अनुमति के वीरपुर बराज से सर्वेक्षण करना संभव नहीं था। इस कारण बराज को छोड़कर सर्वेक्षण शुरू किया गया है।
पांच लाख राशि का मिला है आवंटन
सर्वेक्षण के लिए राज्य मुख्यालय से पांच लाख राशि का आवंटन मिला है। गौरतलब है कि कोसी नदी में बहुतायत संख्या में डॉल्फिन, कछुआ सहित अन्य जलीय जीव और पक्षी हैं। कई साल पूर्व कराए गए सर्वेक्षण में गांगेय प्रजाति की 55 की संख्या में डॉल्फिन पाई गई थी। सहरसा-खगड़िया जिला की सीमा पास फनगो हॉल्ट समीप 12 गांवों के लोकेशन में दो किमी की दूरी पर ही 29 छोटे-बड़े डॉल्फिन देखे गए थे। चार प्रजाति का कछुआ और 99 प्रजाति के पक्षियों का बसेरा कोसी नदी के तट को बना पाया गया था। वहीं मगरमच्छ और घड़ियाल की भी आहट सुनाई दी थी।

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