Tuesday, October 20th, 2026

बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के चलते, 10 दिन में 2 बाघों की मौत

जबलपुर
टाइगर स्टेट का दर्जा वाले राज्य मध्य प्रदेश के जंगलों में बाघों के बीच टेरेटरी को लेकर जमकर संघर्ष चल रहा है। रोजाना हो रही बाघों की लड़ाई में बाघों की मौतों की बढ़ रही घटनाओं ने वन विभाग और प्रदेश सरकार को भी सकते में ला दिया है। वह विभाग के अधिकारी ये बात तो मानते है कि ये संघर्ष बाघों के बढ़ रहे कुनबे के चलते हो रहा है, लेकिन अब मंथन इस बात पर शुरू हो गया कि कहीं इस टेरोटोरियल फाइट में मध्यप्रदेश से टाइगर स्टेट का दर्जा न छिन जाए।

बताते हैं कि पिछले करीब 10 दिनों के भीतर कान्हा टाइगर रिजर्व वाह बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोरवा बफर जोन में दो बाघों की मौत के मामले सामने आए बाघों की मौत का कारण बन विभाग के अधिकारियों ने टेरिटोरियल फाइट होना ही बताया अधिकारियों का मानना है बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है इसी के चलते संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं इन संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए आमतौर पर वैसे तो कोई नियम नहीं है लेकिन वन विभाग इनकी मॉनिटरिंग इन्हें बिना डिस्टर्ब किए हाथियों और कैमरों से कर रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक बात के लिए 50 से 60 किलोमीटर की टेरिट्री होना चाहिए। ऐसी स्थितियों में कई बार बाघों के बीच संघर्ष मेटिंग को लेकर भी होता है।

मध्यप्रदेश  में अभी हैं 526 बाघ
गणना के मुताबिक मध्यप्रदेश में 526 बाघ है। प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या देश के सबसे चर्चित नेशनल पार्क कान्हा टाइगर रिजर्व में है।

वर्सन
बाघों के बीच हैविटेट को लेकर संघर्ष होना सामान्य है। इसी संघर्ष में कई बार बाघ की मौत भी हो जाती है। जिस बाघ का शव मिला है उसके शव के सभी अंग सुरक्षित हैं।
सुनील सिंह, फील्ड डायरेक्टर कान्हा टाइगर रिजर्व

टाइगर रिजर्व में दो दिन पूर्व देर रात कोर जोन में बाघों के बीच फाइट की सूचना मिली थी। सुबह सर्चिंग के दौरान नर बाघ का शव मिला। बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई प्राकृतिक घटना है। बाघों की मॉनिटरिंग की जा रही है शिकार जैसा कोई मामला नहीं है।
विंसेंट रहीम, फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

 

#टाइगर रिजर्व

Source : Agency

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