खुलेआम उड़ाई जा रही नियमों की धज्जियां, हमें वसूली करने से मतलब जाम लगे तो लगता रहे
गंजबासौदा
नगर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने एवं लगातार हो रही वाहन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने एवं जनता में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए विगत वर्षों में पदस्थ रहे प्रशासनिक अधिकारियों ने नो एंट्री प्लान लागू किया था। जिसका बनने के कुछ महीनों बाद से ही कोई कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है। नगर में दिन भर लागू नो एंट्री प्लान की भारी वाहनों द्वारा खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। यातायात पुलिस दिनभर नगर के विभिन्न चौराहों पर वसूली करते देखी जा सकती है। जिन्हें नगर में होने वाले जाम से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहंी होता। पुलिस द्वारा विभिन्न जाम की समस्या अब दिनों दिन आम होती जा रही है जिसके चलते नागरिकों का शहर में चलना दूभर हो गया है।
नगर के जयस्तंभ चौक पर दिन में आधा दर्जन बार जाम लगता है जिससे यहां चारों मार्गों पर वाहनों की लंबी लंबी कतारें लग जाती हैं। जिसके चलते नागरिकों को घंटों जाम में फंसे रहते हैं। लेकिन इसके बाद भी जाम की समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा। वहीं नगर के बीचों बीच स्थित पचमा बायपास जो विदिशा- भोपाल जाने के लिये मुख्य बायपास है। उक्त बायपास पर प्रति दिन घंटो जाम की स्थिति बनी रहती । जहां मार्ग में नो एंट्री प्लान बोर्ड पर अंकित है उसके बाद भी बाहर से आने वाले बड़े वाहन नो एंट्री की धज्जियां उड़ाते हुए नगर में प्रवेश करते हैं, जिससे स्थानीय रहवासियों और शहरवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नगर में लगने वाले भारी जाम की समस्या का निराकरण कराने में मामले में चुप्पी साध रखी है बात बात पर बार बार ज्ञापन देने वाले राजनैतिक दल भी इस और ध्यान नहीं दे रहे। जिससे जाम की स्थिति जश की तश बनी हुई है।
नगर में नो एंट्री प्लान लागू है जिसमें सुबह सात बजे से रात्रि 8 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। नगर में दर्जनों ट्रांसपोर्ट होने और प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही शहर में होने के बाद भी शहर में अभी तक कहीं भी ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बनाया गया जिसके चलते माल परिवहन करने वाले ट्रक और ट्राला नगर के मुख्य मार्गों पर ही खड़े रहते हैं यही नहीं ट्रांसपोर्ट नगर के अभाव में ट्रक माल सप्लाई करने के लिये नगर में प्रवेश कर जाते हैं जिससे आवागमन में अन्य वाहन चालक और पैदल राहगीरों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई ट्रांसपोर्ट शहर के अंदर ही संचालित हो रहे हैं, जिससे कई बार दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं।
नगर में ट्रैफिक जाम की समस्या आज की नहीं यह तो दशकों से चली आ रही है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि पहले अधिकारियों में ईमानदारी और व्यापारियों में आम जनता की परेशानी खुद की परेशानी समझी जाती थी। लेकिन आज के समय में शहर की स्थिति देखी जाये तो न तो अधिकारियों में न ईमानदारी बची और न कुछ व्यापारियों में गैरत, ट्रैफिक में फंसे नागरिकों का कहना है कि यातायात सुधारने क ी जिम्मेदारी जिन यातायात पुलिस को दी गई है। वह मात्र वसूली करने तक अपने कर्तव्य का निर्वाहन कर रही है। लोगों को हो रही परेशानी एवं जाम से उन्हें क्या लेना देना।
नगर के प्रमुख चौक चौराहों पर नो एंट्री के सूचना पटल लगाये गये हैं । जिन पर कुछ निजी एडवरटाइजिंग के लिये उन पर पंपलेट चिपका दिये हैं। जिससे बाहर से आने वाले वाहनों को बोर्ड पर नो एंट्री प्लान नहीं दिखाई देता। जिससे वह शहर में एंट्री कर जाते हैं। वहीं कई भारी वाहन चालक बायपास मार्गों से नगर में प्रवेश कर जाते हैं जिन्हें रोकने की फुर्सत किसी विभाग को नहीं है। नगर के सभी मुख्य मार्गाें के साथ ही बायपास मार्ग भी जाम की चपेट में है। नगर के पचमा बायपास रोड ,लोहामील रोड , सावरकार चौक ,रेलवे स्टेशन ,सुभाष चौक, पारासरी पुल पर भी जाम की स्थिति बनी रहती है जिससे नागरिकों को आवागमन में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पाठको की राय