एक तरफ नौकरियों के लाले, दूसरी तरफ बढ़ गए वीआरएस लेने वाले
गोरखपुर
एक तरफ जहां युवाओं के सामने नौकरी के लाले हैं वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार की नौकरियों में वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने का चलन बढ़ता जा रहा है। कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सेवा पूरी होने के दो से तीन साल पहले ही नौकरी से विदाई ले रहे हैं। वीआरएस के प्रति बढ़ते रुझान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते पांच साल में बीएसएनएल से 218, डाक विभाग से 22 और पूर्वोत्तर रेलवे से करीब 211 अधिकारी और कर्मचारी वीआरएस ले चुके हैं।
वीआरएस लेने के पीछे सबसे बड़ी वजह बीमारी या फिर बाहर रह रहे बच्चों के साथ रहने की चाहत सामने आई है। गोरखुपर मुख्यालय में बतौर पीसीपीओ कार्यरत शैलेन्द्र कुमार ने बीते नवम्बर में परिवार के साथ समय बिताने के लिए वीआरएस ले लिया, उनकी नौकरी अभी दो साल बची हुई थी। इसके साथ ही गोरखपुर रेलवे के ही एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने बीमारी के चलते वीआरएस ले लिया। इसके अलावा एक और बड़ी वजह निकलकर आई है कि निजी कंपनियों में अनुभव के आधार पर अच्छा पैकेज ऑफर किया जा रहा है, जिससे लोग तीन से चार साल पहले वीआरएस लेकर निजी कंपनी का वेतन और सरकारी पेंशन दोनों का लाभ पा जाते हैं।

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