ट्विटर को सरकार के आदेशों का पालन करना ही होगा, अधिकारियों की गिरफ्तारी हो
नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने ट्विटर से साफ शब्दों में कह दिया है कि उसे जिन अकाउंट्स की लिस्ट सौंपी गई है, उन्हें सेंसर करना ही होगा। ऐसा न करने की सूरत में भारत में उसके शीर्ष अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा सकता है। सरकार ने कहा कि 'भड़काऊ कंटेंट' वाले खासतौर से वे अकाउंट्स जिन्होंने किसानों के नरसंहार वाले हैशटैग्स के साथ ट्वीट किए थे, उनपर कोई बातचीत नहीं हो सकती। सरकार ने कहा कि आईटी ऐक्ट की धारा 69A के तहत दिए आदेश का पालन करने से कंपनी के इनकार पर उसका धैर्य जवाब देने लगा है।
अमेरिकी माइक्रो-ब्लॉगिंग कंपनी ने सरकार के आदेश को आंशिक रूप से लागू किया था। सरकार की लिस्ट में से करीब आधे अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है। भारत सरकार ने जैसा रुख अख्तियार किया है, उसे देखते हुए ट्विटर को अब अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है। कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि 'जिन लोगों की हम सेवा करते हैं, उनके लिए अभिव्यक्ति के अधिकार' की रक्षा करेंगे।
कैपिटल हिल से तुलना कर IT सेक्रेटरी ने खूब सुनाया
केंद्रीय आईटी सचिव अजय प्रकाश साहनी और ट्विटर अधिकारियों- मोनिक मेशे और जिम बेकर की वर्चुअल मुलाकात हुई। साहनी ने साफ कर दिया कि विवादित हैशटैग का इस्तेमाल न तो पत्रकारीय स्वतंत्रता थी, न ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्योंकि ऐसा 'गैर-जिम्मेदार कंटेट भड़का सकता है' हालात को 'और गंभीर' बना सकता है। साहनी ने इस बात पर भी नाखुशी जताई कि ट्विटर कैपिटल हिल और लाल किले में हुई घटनाओं के सिलसिले में अलग-अलग रुख अपना रहा है।
सरकार से जुड़े एक सूत्र ने कहा, "ट्विटर को आदेशों का पालन करना ही होगा। यह बातचीत का विषय नहीं है। यह देश का कानून है और अगर किसी को हमारी कार्रवाई से दिक्कत है तो आप कानूनी रास्ता अख्तियार करने को स्वतंत्र हैं।"

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